Tuesday, April 23, 2024
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International Women’s Day : गिरिजा देवी से जुड़ी एक घटना ने बदली जिंदगी, आज काशी की बेटी भारतीय संगीत और कलाकारों को दिला रही पहचान

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International Women’s Day : कभी-कभी जीवन में कुछ हादसे या ऐसी घटनाएं घटती हैं जो लोगों के दिल पर काफी बड़ा आघात पहुंचाती है और वो उनकी जिंदगी में एक बड़े परिवर्तन की कहानी लिखने वाली होती है, लेकिन इसका अंदाजा उन्हें खुद भी नहीं होता। कुछ ऐसा ही हुआ काशी की बेटी शिवानी खन्ना के साथ, जिनकी कुछ अलग हटकर करने की सोच ने देश के भारतीय संगीत को सहेजने और इससे जुड़े कलाकारों की कला से लोगों को रूबरू कराने के लिए वाराणसी से काशी विरासत फाउंडेशन (KVF)  की शुरुआत की। इतना ही नहीं अपने बुलंद हौंसले के बल पर उन्होंने बनारस से अपने काम की शुरुआत को एक नया आयाम देते हुए अपनी दूसरी संस्था कोलकाता में शुरु कर ली। आज इंटरनेशनल वूमेन्स डे (International Women’s Day 2024) के अवसर पर हम आपको शिवानी की संस्था और उनकी जीवन के संघर्षों से आपको रूबरू कराएंगे, जिनकी कहानी आपको भी कुछ कर गुजरने और कुछ अलग सोचने को मजबूर कर देगी।

जानें कौन है शिवानी खन्ना

वाराणसी की रहने वाली 28 वर्षीय शिवानी खन्ना एक मध्यम वर्गीय परिवार में पली बढ़ी है, उनकी स्कूलिंग भी यहीं से हुई है। उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी बीएचयू से एमए कंप्लीट किया और उसके बाद ग्राफिक डिजाइनर का कोर्स किया। छोटे उम्र में ही शिवानी के पिता का देंहात हो गया था उसके बाद उनकी मां प्रीति खन्ना ने ही उन्हें माता-पिता दोनों का प्यार दिया पाला-पोशा। 2018 में शिवानी बनारस छोड़कर अपने मां के साथ कोलकाता नाना-नानी के घर चली गई। उस दौरान उन्हें अपने करियर को लेकर काफी संघर्ष किया, उनकी मां ने उन्हें हर मुसीबत में डटकर खड़े रहने की प्रेरणा दी और उन्हें परिस्थियों से लड़ना सिखाया।

इस तरह हुई काशी विरासत फाउंडेशन की शुरुआत

शिवानी ने अपनी संस्था के बारे में बताते हुए कहा कि काशी विरासत फाउंडेशन की शुरुआत 2017 में हुई थी, तब इंस्टाग्राम के जरिए बनारस एंड म्यूजिक नाम के एक पेज ओपन कर भारतीय संगीत और विशेषकर बनारस घराने के म्यूजिक को प्रमोट करना और उनके बारे में लोगों को जागरुक करवाना शुरु किया। इसके बाद धीरे-धीरे बनारस घराने के गई बड़े कलाकार पेज से जुड़ते गए और उन सब ने हमारे इस छोटे से प्रयास को सराहा।

इस घटना ने शिवानी को काफी आहत किया

शिवानी ने बनारस एंड म्यूजिक के काशी विरासत फाउंडेशन में तब्दील होने के बारे में बताते हुए बताया कि 25 नवंबर 2017 डाला छठ की शाम पूजा के दिन विदुषी गिरजा देवी जी का पार्थिव शरीर काशी लेकर आया गया। और उनको राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी जा रही थी, लेकिन मुझे तब बहुत हैरानी हुई जब वहां पर मौजूद कुछ लोग उनका नाम सुनकर भी उनको पहचान नहीं पाए। इस बात से मैं काफी आहत हुई और एक पल के लिए मेरे दिल-दिमाग में बस यही सवाल था कि इतनी बड़ी हस्ती को भी लोग नहीं पहचान पा रहे हैं, जिन्होंने अपनी कला के लिए पद्मश्री, पद्मभूषण, पद्म विभूषण, संगीत नाटक एकेडमी जैसे कई सामानों से सुशोभित किया गया।

अप्पा जी की जन्म जयंती पर रखीं संस्था की नींव

शिवानी बताती है कि फिर उन्होंने सोचा अगर आज कोई बॉलीवुड या हॉलीवुड का कोई गायक या आर्टिस्ट अप्पाजी की जगह होता तो शायद हर न्यूज़ चैनल, न्यूज़ पेपर उस खबर को कवर करने पहुंच जाते लेकिन इतनी महान कलाकार के निधन पर कुछ लोकल मीडिया को छोड़कर और कोई भी मौजूद नहीं था। ये देख जहां हैरानी हुई, वहीं मन को काफी कष्ट पहुंचा और ये बात इतनी ज्यादा मेरे दिल पर लगी कि मैंने वहीं से उसी पल ये डिसाइड किया कि मुझे अपने देश की कला और उसके प्रचार-प्रसार के लिए कुछ करना है। फिर 8 मई 2018 को विदुषी गिरजा देवी जी के जन्म जयंती के दिन हमने बनारस एंड म्यूजिक का नाम बदल के काशी विरासत फाउंडेशन की नींव रखी और आज भी काशी और भारतीय संगीत को प्रमोट करने का यह प्रयास जारी है।

संस्था से जुड़े लोगों ने ही की थी छवि खराब करने की कोशिश

शिवानी ने संस्था को आगे बढ़ाने के दौरान आने वाली समस्याओं से रूबरू कराते हुए बताया कि शुरुआत में सबसे बड़ी समस्या तब आई जब अपने ही ऑर्गनाइजेशन से जुड़े हुए कुछ लोगों ने हमारी छवि खराब करने की कोशिश की फिर भी उस परिस्थिति में भी हमने बहुत संयम से काम लिया और एक बेहतरीन कार्यक्रम आयोजित करके हमारी प्रेरणा गिरजा देवी जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

फंड की होती है कमी

शिवानी ने आगे बताया कि सबसे बड़ी समस्या होती है वो है फंड की, क्योंकि हमारा एनजीओ अभी पूरी तरह से रजिस्टर्ड नहीं हुआ है। तो कई बार फंड्स ना होने या कम होने की वजह से खुद के सेविंग में से भी सहयोग देके संस्था का काम आगे बढ़ाना पड़ता है।

संस्था द्वारा कराया गया कार्यक्रम

शिवानी ने बताया कि संस्था का पहला कार्यक्रम गिरजा देवी जी को समर्पित था, संस्मरण-अप्पा जी का (2018) और उसके साथ ही सोशल मीडिया के जरिए भी संगीत का प्रचार-प्रसार चलता रहा।

केवीएफ की दूसरी शाखा की शुरुआत

शिवानी ने बताया कि काफी मुश्किलों का सामना करने के बावजूद हमने कोलकाता में अपने दूसरे शाखा की शुरुआत की। जैसा कि आप सभी जानते है कोलकाता को कल्चर कैप्टिल ऑफ इंडिया कहते है और गंगा भी बनारस से बहते हुए बंगाल से होते हुए बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है, उसी तरह हमने भी बनारस में अपने काम की शुरुआत को एक नया आयाम देते हुए उसकी दूसरी संस्था कोलकाता में शुरु की, जिसमें मेरी चचेरी बहन स्वाति सिंह ने बड़ा सहयोग दिया और भारतीय संगीत को लोगों तक पहुंचाने और जागरुक करने का बहुत ही सराहनीय काम किया।

कोलकाता स्थित केवीएफ की शाखा

2018-2019 में दुर्गा पूजा के दौरान मां दुर्गा एवं नारी शक्ति को सम्मान देने के लिए, तेजस्विनी नामक श्रृंखला की शुरुआत की, लेकिन बाद में लोगों के कम सपोर्ट के कारण इस श्रंखला को आगे सुचारु रुप से नहीं चलाया जा सका। फिर 2020 में यूट्यूब पर वार्तालाप विथ स्वाती सिंह नाम के कार्यक्रम की शुरुआत की जिसका निर्देशन और स्क्रिप्ट राइटिंग मैनें ही किया था, लेकिन 2020 में कोविड आने के बाद इस कार्यक्रम के दो एपिसोड के अलावा कोई और एपिसोड शूट नहीं किया जा सका।

शिवानी ने बताया कि 2020 की शुरुआत और कोविड-19 के भारत में फैलने से पहले काशी की संगीत परंपरा नाम से भी एक भव्य कार्यक्रम किया था, जिसमें बनारस घराने से आज के युवा पीढ़ी के कलाकारों ने शामिल होकर कार्यक्रम को हिट बनाया।

कोविड में संगीत के जरिए लोगों का बढ़ाया हौसला

जहां एक और पूरा देश कोविड का दंश झेल रहा था, वहीं दूसरी ओर हमने संगीत के जरिए लोगों का हौसला बढ़ाने का एक प्रयास किया और कई ऑनलाइन प्रोग्राम किए। जिसमें पहला प्रोगाम 21 दिन-21 कलाकार था, जिसमें बनारस घराने से जुड़े बड़े-बड़े कलाकारों ने हमारे साथ जुड़कर बनारस घराने के गायन-वादन और नृत्य से हम सभी को अवगत कराया।

दूसरा कार्यक्रम अप्पा जी को डिजटली श्रद्धांजलि

दूसरा कार्यक्रम कोविड के दौरान अप्पा जी को डिजटली श्रद्धांजलि अर्पित करने का कराया। तीसरा कार्यक्रम Featured The Child Prodigy In Indian Classical Music, जिसमें क्लासिकल म्यूजिक में अच्छा काम करने वाले बच्चों की आवाज आमजन तक पहुंचाने के लिए हमने इस कार्यक्रम के जरिए एक कोशिश की।

अपने चौथे कार्यक्रम में हमने NRI MUSICIANS AND ARTIST FROM ABROAD IN INDIAN CLASSICAL MUSIC आयोजित किया जिसमें हमने इंटरनेशनल आर्टिस्ट को फीचर किया। पांचवा कार्यक्रम गुरू पूर्णिमा पर अपने गुरूओं को याद कर उनसे सीखे संगीत शिक्षा को पुरुषार्थ किया।

शिवानी को अवार्ड के लिए किया गया था नॅामिनेट

केवीएफ का सबसे बड़ा कदम

केवीएफ का सबसे बड़ा कदम 2022 में गिरिजा देवी जी की जन्म जयंती के दिन ही हमने इंस्टीट्यूट ऑफ केवीएफ की शुरुआत करना था और इसी वर्ष 2023 में चारुकला सोसाइटी के अंतर्गत इसे रिजस्टर्ड कराया, जहां पर गोल्ड मेडलिस्ट टीचर द्वारा बच्चों को ऑफलाइन संगीत की ट्रेनिंग दी जाती है।

कोलकाता में हुए कुछ महत्वपूर्ण इवेंट

कोलकाता में हमने सीनी एनजीओ में अलग-अलग trauma (सदमा) से जुड़े रहे बच्चों के लिए म्यूजिक और क्राफ्ट का वर्कशॅाप ऑर्गनाइज किया। उसके बाद श्री जैन और अन्नया स्कूल में जाकर भी संगीत का प्रसार किया।

मां के साथ और लोगों के विश्ववास ने बढ़ाया आगे

शिवानी ने बताया कि केवीएफ को आगे बढ़ाने में मेरी मां जो कि केवीएफ की कल्चरल सेक्ट्ररी है उनका सबसे बड़ा सहयोग रहा। उनके साथ हमारी को-फाउंडर स्वाती सिंह ने भी अपना योगदान देकर केवीएफ को हमेशा आगे बढ़ाने के लिए बहुत सहयोग दिय़ा, इसके अलावा हमारे बनारस के काशी विरासत फाउंडेशन से जुड़े लोगों में विनय कपूर, माला मिश्रा और आंचल प्रजापति ने बहुत कार्य किया।

गिरिजा देवी की बेटी ने किया मार्गदर्शन

उन्होंने बताया कि केवीएफ की चेयरपर्सन गिरजा देवी जी की बेटी है, उन्होंने अपने मार्गदर्शन से हमें आगे बढ़ाने के लिए बहुत सहयोग किया। उनके अलावा राजरुपा देवी और संदीप देव ने अपने आशीर्वाद के साथ हमें आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

शिवानी ने अपने काशी विरासत के सफर को हमसे शेयर करने के बाद अंत में कहा कि अप्पा देवी जी की लाडली शिष्या सुनन्दा शर्मा, लोकगायिका मालिनी अवस्थी और सुधा चंद्रन जी हमारे काम को आशीर्वाद दे। हमारी यही कोशिश है कि अपनी संगीत परम्परा को बढ़ावा देने के लिए हमने जो मशाल जलाई है वो इसी तरह जलती रहे और हमारी भारतीय संगीत की विरासत को रौशन करती रहें।

बता दें कि अभी शिवानी कोलकाता के Entiovi Technologies में एचआर के पद पर कार्यरत है और काशी विरासत फाउंडेशन की फाउंडर है। अभी हाल ही में शिवानी खन्ना और डॅा गायित्री द्वारा अभिनेत्री व नृत्यांगना सुधा चंद्रन के जीवन पर लिखी पुस्तक (The Unstoppable Sudha Chandran) भी प्रकाशित हुई है, जिसमें उन्होंंने उनके जीवन संघर्ष को बतलाया है।

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