Wednesday, July 24, 2024
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Atiq Ahmed : हर वारदात को देता था खूंखार अंजाम, खाल खींचकर चौराहे पर फेंका, थाने में फोन कर बोला- अभी जिंदा है, ले जाओ

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Atique Ahmed : गैंगस्टर अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद की प्रयागराज में मेडिकल के लिए ले जाते समय बीते शनिवार की रात गोली मारकर हत्या कर दी गई है। एक समय था जब प्रयागराज में अतीक की तूंती बोलती थी, उसके आतंक से लोग खौफ खाते थे। वो हर वारदात को अपने खूंखार अंदाज में अंजाम देता था। जिसका एक उदाहरण प्रयागराज के धूमनगंज थाना क्षेत्र के चकिया इलाके में एक शख्स की खाल उधेड़कर उसे अधमरी हालत में चौराहे पर फेंक दिया था। ये वो वारादात है, जिसके बारे में कम लोग जानते होंगे।

सामान्य मारपीट या हत्या की घटना को सरेआम देता था अंजाम

90 के दौर में धूमनगंज और प्रयागराज में तैनात पूर्व पुलिसकर्मी के अनुसार, अतीक अहमद सामान्य मारपीट या हत्या की घटना को सरेआम किया करता था जिससे हर आपराधिक घटना के बाद समाज और सिस्टम के दिल में उसका खौफ बकरार रहे। बात है 1979 में 17 साल की उम्र में चकिया में कत्ल की पहली वारदात के बाद आतीक अहमद ने अपराध का सिलसिला शुरु (Atiq Ahmed Empire) किया था।

प्रयागराज में खौफ से लिया जाने लगा था अतीक का नाम

1989 में चांद बाबा की हत्या के कुछ महीने बाद अतीक अहमद का नाम प्रयागराज में खौफ से लिया जाने लगा था। ये वो समय था, जब अतीक अहमद बड़ा बाहुबली बनने की राह पर तेजी से चलने लगा था। जमीनों पर उसके गैंग के द्वारा अवैध कब्जों की शुरुआत हो चुकी थी। एक शख्स ने जमीन पर कब्जे के एक मामले में उसका विरोध किया। वो शख्स अतीक के गैंग के सामने न झुकने की बात कहकर मुंबई में अपने रिश्तेदार के यहां चला गया।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, अतीक ने अपने गुर्गे भेजकर उस शख्स को मुंबई से बुलवाया। गैंगस्टर अतीक चाहता तो गुर्गों के हाथों उस शख्स को धमकाकर, पिटवाकर अपनी बात मनवा सकता था, लेकिन उसने उस युवक को साजिश के तहत चकिया बुलाया।

युवक की खाल उधेड़ कर चौराहे पर फेंक दिया था

धूमनगंज थाने में तैनात रहे पूर्व पुलिसकर्मी के अनुसार, अतीक ने मुंबई से बुलाकर उस युवक को एक होटल में बुरी तरह मारापीटा। इस दौरान वह युवक चिल्ला रहा था, गिड़गिड़ाते हुए माफी मांग रहा था। यहां तक की वो इतना दहशत में आ गया कि वे अपनी जमीन अतीक को फ्री में देने को तैयार हो गया था। अतीक चाहता तो उसे छोड़ देता, लेकिन उसकी आपराधिक मानसिकता वाले दिलो-दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। उसने अपने गुर्गों के जरिए उस युवक के शरीर के एक हिस्से की खाल निकलवा दी। इसके बाद उसे अधमरी हालत में एक चौराहे पर फेंक दिया।

थाने पर फोन कर कहा उसकी खाल निकाल दी

इतना ही नहीं अतीक वापस घर पहुंचा। उस समय लैंडलाइन फोन ही हुआ करते थे। माफिया अतीक ने अपने घर से धूमनगंज थाने को फोन किया। एक पुलिसकर्मी ने फोन उठाया तो अतीक गालियां देते हुए बोला- “वो**चौराहे पर पड़ा है उसकी खाल निकाल दी है। अभी जिंदा है, ले जाओ.” ये जानकर आपको हैरानी होगी कि ये दुर्दांत घटना के रूप में दर्ज होनी चाहिए थी, लेकिन इस मामले में कोई एफआईआर तक नहीं हुई।

पुलिस भी नहीं कर सकी थी रिपोर्ट दर्ज ने की हिम्मत

उस युवक को घायल हालत में इलाज कराने के लिए पुलिस ही उठाकर ले गई थी, लेकिन क्या हिम्मत किसी को जो कि रिपोर्ट लिखी जाती। जाहिर है, मामला माफिया अतीक अहमद का था और उस समय तक तो वो विधायक भी बन गया था। अब अपराधी सफेदपोश धारण कर चुका था, सियासी चोला मिलते ही वो और ताकतवर हो गया। इसलिए अतीक का खौफ सिर्फ समाज पर ही नहीं, बल्कि पुलिस और सिस्टम पर भी हो चुका था, इसलिए ये घटना सिर्फ कुछ लोगों की जहन में ही जिंदा रह सकी।

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