Tuesday, April 23, 2024
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Pitru Paksha 2023 : इन रूपों में पितर आते हैं आपके द्वार, भूलकर भी इन्हें न करें नाराज

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Pitru Paksha 2023 : कल 28 सितंबर से पितृपक्ष की शुरुआत हो रही है, जिसका समापन 14 अक्टूबर को होगा। अश्विन कृष्ण प्रतिपदा से अमावस्या तक 15 दिनों का पितृपक्ष होता है लेकिन इस बार पूर्णिमा से पितृपक्ष की शुरुआत होने से यह 16 दिनों तक का होगा। मान्यता है कि पितृपक्ष (Pitru Paksha 2023) के दौरान पितर धरती पर अपने वंशजों के बीच निवास करते हैं और अपने परिवार वालों को आर्शीवाद देते हैं। इस दौरान वो उम्मीद करते हैं कि उनकी संतानें उनके लिए श्राद्ध (Shardh), तर्पण (Tarpan) या पिंडदान (Pinddan) आदि करेंगे, क्योंकि इन कार्यों से वे तृप्त होते हैं। तृप्त होने के बाद वे अपने बच्चों को आशीर्वाद देकर अपने लोक वापस चले जाते हैं। इस दौरान पितर किसी भी रुप में आपको दर्शन देने आपके घर आ सकते है, ऐसे में उन्हें कभी निराश ना करें।

Pitru Paksha 2023 : मनुष्य से लेकर पक्षी तक इन रूपों में आते है पितर

पितृपक्ष (Pitru Paksha 2023) के दौरान पितर मनुष्य से लेकर पक्षी (Bird) तक, कई रूपों में पितर आपके द्वार पर आ सकते हैं, लेकिन आप उन्हें पहचान नहीं पाते। ऐसे में भूलकर भी उनका अपमान न करें। ऐसा करने से उनकी आत्मा दुखी होगी और वे नाराज होकर वापस लौट जाएंगे। आइए जानते है कि पितर किस रुप में आ सकते है…

जानें किस किस रुप में आते है पितर

कौआ (Crow)

मान्यता है कि पितृपक्ष (Pitru Paksha 2023) में बिना कौए को भोजन कराए पितरों को संतुष्ट नहीं किया जा सकता है। कौए को भोजन कराने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। शास्त्रों के अनुसार कौए को पितरों ( Pitru) का रूप माना जाता है, कौए की सेवा करने से पितर खुश होते हैं और परिजनों को खुशहाल जीवन का आशीर्वाद देकर जाते हैं।

यह भी पढ़ें-Pitru Paksh 2023 : अबकि एक ही तिथि में द्वितीया व तृतीया का श्राद्ध, शुभ कार्य और खरीदारी करने का विशेष संयोग !

कुत्ता-गाय-बिल्ली

पितृपक्ष (Pitru Paksha 2023) के दौरान पंचबली भोग के दौरान गाय (Cow) और कुत्ते (Dog) का भोग भी निकाला जाता है। ऐसे में पितृपक्ष के दिनों में कुत्ते का घर आना शुभ माना जाता है। शास्त्रों में कुत्ते को यम का दूत माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि अगर कुत्ता (Dog) कभी रास्ते में दिख जाए, तो इसे कभी भी मारकर नहीं भगाना चाहिए। कुत्ते को कुछ खाने के देने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। वहीं कहा जाता है कि गाय की सेवा आदि करने से भी पितर प्रसन्न होते हैं, इसके अलावा, बिल्लियों को भी दूध आदि पिलाना चाहिए।

गरीब

श्राद्ध (Shradh) के दिनों में गरीबों को खाना खिलाने की परंपरा है। पितृपक्ष (Pitru Paksha 2023) के दौरान अगर आपके दरवाजे कोई भी गरीब आता है, तो उसे कभी भी भूखा या खाली पेट वापस ना करें। कहते हैं कि पितर (Pitru) आपके पास किसी भी रूप में आ सकते हैं। ऐसे में घर के बाहर आए गरीब को अच्छे से भोजन कराएं, साथ ही, कुछ दान-दक्षिणा देकर उन्हें विदा करें।

पितरों को श्राद्ध कराना जरुरी

पितृपक्ष (Pitru Paksha 2023) में पितरों का श्राद्ध (Shardh) करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। हमारे पितृ (Pitru) पशु पक्षियों के जरिए हमारे करीब आते हैं और गाय, कुत्ता, कौआ और चींटी के माध्यम से पितृ (Pitru) भोजन ग्रहण करते हैं।

बता दें कि, पितृपक्ष के इन 16 दिनों में पितरों को खुश कराने के लिए ब्राह्मणों (Brahman) को भोजन कराया जाता है। इसके साथ ही पंचबलि यानी गाय (Cow), कुत्ते (Dog), कौए(Crow), देवता और चीटियों को भोजन सामग्री दी जाती है। खासतौर से खीर-पुड़ी (Kheer-Pudi) खिलाई जाती है। ऐसा करने से पितृ देवता भी खुश (Happy) होते हैं। इस परम्परा के पीछे धार्मिक कारण भी है लेकिन उसे बहुत कम लोग जानते हैं।

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