Tuesday, April 23, 2024
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योगी माने ब्रांड! पहली बार CM बनने का रोचक किस्सा, अजय सिंह बिष्ट से Yogi Adityanath तक का सफर

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Yogi Adityanath Birthday : आज 5 जून को सीएम योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) अपना 51 वां जन्मदिन मना रहे है। आज सीएम योगी एक फायर ब्रांड नेता के रूप में जाने जाते है। उनके जन्मदिन के इस खास अवसर पर हम आपको सीएम योगी के बचपन से लेकर सियासी सफर तक की कुछ दिलचस्प किस्सों से रूबरू कराएंगे।

Yogi Adityanath : बचपन में अजय बिष्ट नाम से जाने जाते थे योगी

योगी आदित्यनाथ ( Yogi Adityanath) का जन्म पांच जून 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में यमकेश्वर तहसील के पंचुर गांव के एक गढ़वाली क्षत्रिय परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम आनंद सिंह बिष्ट था, जो एक फॉरेस्ट रेंजर थे और मां सावित्री देवी गृहणी थी। अपने माता-पिता के सात बच्‍चों में योगी शुरू से ही सबसे तेज तर्रार थे, उनके बचपन का नाम अजय सिंह बिष्ट था।

शिक्षा

अजय ने अपनी प्राथमिक स्कूली शिक्षा थांगड़ सरकारी प्राथमिक स्कूल से हासिल की। उसके बाद 9वीं-10वीं टिहरी के गाजा स्थित सरकारी स्कूल से पास किया। फिर 11वीं और 12वीं की पढ़ाई उन्होंने ऋषिकेश से की, यहां वो अपने बड़े भाई मनेंद्र के साथ रहते थे। इसके बाद कोटद्वार के पीजी गवर्नमेंट कॉलेज सन् 1989 में उन्होंने अपना ग्रेजुएशन कंप्लीट किया।

ग्रेजुएशन के बाद अजय ने सन् 1992 में पंडित ललित मोहन शर्मा गवर्नमेंट पीजी कॉलेज, ऋषिकेश में Msc के लिए एडमिशन लिया। इसके बाद सन् 1993 में जब अजय गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मठ के महंत अवैद्यनाथ से मिले थे, तो उन्होंने उनसे कहा कि वह एक जन्मजात योगी हैं और एक दिन उसका वहां आना निश्चित है। बता दें कि, महंत अवैद्यनाथ के साथ अजय की यह पहली बातचीत नहीं थी, वह 1990 में भी उनसे मिल चुके थे, जब महंत ‘राम जन्मभूमि मुक्ति’ आंदोलन के लिए भारत भ्रमण पर निकले थे।

1993 में गांव परिवार के साथ छोड़ दी पढ़ाई

तब अजय अवैद्यनाथ से काफी प्रभावित हुए थे। इसी का परिणाम था कि नवंबर 1993 में अजय ने अपने गांव माता-पिता और अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी और वह गोरखपुर चले गए और उन्होंने अवैद्यनाथ को ही अपना गुरु मान लिया। इसके बाद 15 फरवरी सन् 1994 को अवैद्यनाथ ने नाथ पंथ योगी के रूप में उनका अभिषेक किया।

जब पिता को मिली संन्यास की खबर

जब अजय सबकुछ छोड़कर गोरखपुर चले गए, उसके ठीक दो महीने बाद उनके माता-पिता को अखबार के जरिए उनके संन्यास लेने का पता की चलता है। इससे पहले तक उनके माता-पिता यही सोच रहे थे कि वह किसी रोजगार की खोज में गोरखपुर गए हुए हैं, लेकिन संन्यास की जानकारी मिलने के बाद अजय के माता-पिता अगली ही ट्रेन से गोरखपुर पहुंचे और मठ में उन्हें संन्यासी के वस्त्र में देखकर हैरान रह गए। उस समय महंत अवैद्यनाथ शहर से बाहर गए हुए थे और अजय को ही अपने माता-पिता को मनाना पड़ा, उन्होंने अपने गुरु से फोन पर उनकी बात कराई।

महंत अवैद्यनाथ ने अजय के पिता को बताया कि उनका बेटा अजय अब योगी आदित्यनाथ बन चुका है। उन्होंने अजय के माता-पिता से उनके आगे के सफर के लिए अनुमति भी मांगी। पहले तो उनके माता-पिता नहीं माने लेकिन आखिरकार उन्होंने भी अनुमति दे दी और मान गए।

जब अपने पहले चुनाव में हारे थे योगी

सन् 1992 में अजय अपने कॉलेज में छात्र निकाय के चुनावों में सचिव पद के लिए चुनाव लड़ना चाहते थे। वह ABVP से सचिव पद के लिए अपनी उम्मीदवारी पर मुहर लगवा सकते थे, अगर इस संगठन के एक और छात्र पद्मेश बुदलाकोटी ने भी उसी पद के लिए टिकट नहीं मांगा होता, लेकिन आंतरिक विवाद को सुलझाने के लिए एबीवीपी ने तीसरे व्यक्ति दीप प्रकाश भट्ट को टिकट दे दिया। जब एबीवीपी का टिकट नहीं मिला, तो अजय ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और वो हार गए। यह उनका पहला चुनाव था।

ऐसे आगे बढ़ा योगी का राजनीतिक सफर

सन् 1996 में योगी आदित्यनाथ को महंत अवैद्यनाथ के लिए चुनाव प्रचार के प्रबंधन का प्रभारी बनाया गया। 1998 में उन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास लिया, तो योगी ने उनकी सीट गोरखपुर से अपना पहला लोकसभा चुनाव लड़ा और उसमें जीत का परचम लहराया। इसके बाद योगी 5 बार इस सीट से सांसद चुने गए।

फिर 2017 में जब योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने विधानमंडल का सदस्य बनने की अनिवार्यता के तहत विधान परिषद का सदस्य बनने का रास्ता चुना मगर 2022 के विधानसभा चुनाव में वह विधायक बने हैं।

एक ब्रैंड नेता के रूप में नजर आने लगे योगी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में भाजपा की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले योगी आदित्यनाथ ब्रैंड नेता के रूप में नजर आने लगे हैं। उन्हें ‘बुल्डोजर बाबा’ का नया नाम मिला। बता दें कि सीएम योगी अपने चुनावी फॉर्म में पिता के नाम के कॉलम में महंत अवेद्यनाथ का नाम लिखते हैं।

पहली बार CM बनने का रोचक किस्सा

योगी आदित्यनाथ ( Yogi Adityanath) ने अपने पहली बार सीएम बनने के दिलचस्प किस्से के बारे में ‘आज तक’ को दिए एक इंटरव्यू में बताया था। जब उनसे पूछा गया था, ”क्या आपको उम्मीद थी कि अगर पार्टी (बीजेपी) जीत जाती है तो आप मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार होंगे?” इस सवाल के जवाब में तब योगी ने कहा था, ”मैंने इस बारे में कभी सोचा नहीं था और न ही इस तरह की कोई इच्छा थी। विधानसभा चुनावों के दौरान हमने उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों के अनेक क्षेत्रों में भी काम किया। पिछले तीन महीने काफी व्यस्त रहे और इसलिए मैं एक हफ्ते का आराम चाहता था और सौभाग्य से सही समय पर मुझे एक मौका भी मिला।

फिर 4 या 5 मार्च को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज जी का फोन आया और उन्होंने मुझे जानकारी दी कि पोर्ट ऑफ स्पेन में एक कार्यक्रम है और पूछा कि मैं जा सकता हूं या नहीं। मुझे लगा कि 6 मार्च को चुनाव प्रचार समाप्त हो जाएगा और उसके बाद मैं चला जाऊंगा, तब मैंने अपने वीजा के लिए अप्लाई किया मेरा पासपोर्ट जमा कराया गया, लेकिन पीएमओ ने मेरा पासपोर्ट वापस लौटा दिया।

इसके आगे उन्होंने बताया, कि 10 मार्च को विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने मुझे बताया कि उस कार्यक्रम के लिए किसी और सांसद को भेजा जाएगा। तब मुझे थोड़ी निराशा हुई। मुझे लगा कि इस तरह के प्रतिनिधिमंडल के साथ पहले भी मुझे तीन मौके मिले थे, जिनमें से दो में मैं खुद ही नहीं गया। उसी दिन गोरखपुर लौटने के दौरान मुझे विदेश मंत्री जी का फोन आया, जिन्होंने बताया कि पीएमओ ने मुझे यात्रा पर जाने से मना कर दिया है, क्योंकि प्रधानमंत्री जी को लगता है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा का रिजल्ट जब कल आएंगा तो मेरी जरूरत होगी, फिर मैं होली उत्सव के लिए गोरखपुर वापस लौट आया और पार्टी की बैठक के लिए दिल्ली गया।

जब चुनाव परिणाम आए, तब मैंने पार्टी के किसी भी सदस्य से मुलाकात नहीं की। सुबह करीब सवा दस बजे अमित शाह जी के आग्रह पर मैं उनसे मिलने पहुंचा और हमारे बीच चुनाव के नतीजों पर एक सामान्य चर्चा हुई, जिसके बाद मैं गोरखपुर लौट गया। शाम को अमित जी ने मुझे फिर फोन किया और जब उन्हें पता चला कि मैं गोरखपुर में हूं तो उन्होंने अगली सुबह मेरे लिए एक चार्टर प्लेन का इंतजाम किया, जिससे मैं दिल्ली आया और उनसे मिला। उन्होंने मुझसे कहा कि आपको लखनऊ जाना है और मुख्यमंत्री पद की शपथ लेनी है।

इस तरह योगी आदित्यनाथ ( Yogi Adityanath) ऐसे समय पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, जब इस पद के लिए राजनाथ सिंह, उमा भारती, मनोज सिन्हा, स्वतंत्र देव सिंह, दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्य जैसे कई बीजेपी नेताओं को लेकर भी लगातार अटकलें काफी थीं।

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