Tuesday, May 28, 2024
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Hanuman Janmotsav 2024 : यहां नारी रूप में पूजे जाते है हनुमान जी, भक्तों की हर मनोकामना होती है पूरी

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Hanuman Janmotsav 2024 : पवन पुत्र हनुमान और भगवान श्री राम के भक्त हनुमान जी को बाल ब्रह्मचारी कहा जाता है, यही कारण है कि महिलाओं को उनकी मूर्ति छूने की मनाही होती है। वैसे तो पूरे देश में हनुमान जी के कई अद्भुत व चमत्कारी मंदिर है, लेकिन आज हम आपको हुनामन जनमोत्सव (Hanuman Janmotsav 2024) के पावन अवसर पर भारत में स्थित एक ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे, जहां हनुमान जी को नारी रूप में पूजा जाता है। इस मंदिर में दर्शन को आने वाले सभी भक्तों की बजरंगबली सभी मनोकामनाओं को पूरा करते है। बता दें कि, हनुमान जी के नारी रूप के पीछे दस हजार साल पुरानी कहानी है जुड़ी है, तो आइए जानते है इससे जुड़ी पौराणिक कथा क्या है।

जानें कहां स्थित है यह मंदिर?

हम जिस मंदिर की बात कर रहें है वो मंदिर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से 25 किमी दूर स्थित है। इस शहर को महामाया शहर भी कहा जाता है क्योंकि चर्च में स्थित मां महामाया देवी और हनुमानजी का मंदिर है। इस छोटे से शहर में स्थित यह दुनिया का एकमात्र हनुमान मंदिर है जहां हनुमान जी को एक महिला के रूप में पूजा जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंदिर में आने वाले ये भक्त हजारों मन्नत लेकर आते हैं और इस जगह से वे कभी निराश नहीं होते। लोगों के सम्मान और भावना से भरे इस मंदिर में हमेशा लोगों का आना-जाना लगा रहता है।

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ये है मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

इस मंदिर की स्थापना तत्कालीन राजा पृथ्वी देवजू ने कराई थी। एक बार की बात है कि राजा पृथ्वी को कुष्ठ रोग हो गया। इसके लिए उन्होंने सभी प्रयत्न किए, लेकिन उनका कुष्ठ रोग ठीक नहीं हुआ। तब उन्हें किसी ज्योतिष ने हनुमान जी की पूजा-उपासना करने की सलाह दी। राजा पृथ्वी ने हनुमान जी की कठिन भक्ति की, जिससे प्रसन्न होकर हनुमान जी एक रात स्वप्न में आकर बोले-अपने क्षेत्र में एक मंदिर बनवाओ, जिसके समीप एक सरोवर खुदवाओ। इस सरोवर में स्नान करने से तुम्हारा कुष्ठ रोग दूर हो जाएगा।

जिसके बाद राजा देवजू ने हनुमान जी के वचनों का पालन कर मंदिर बनवाया, सरोवर खुदवाया और सरोवर में स्नान भी किया। इससे राजा का कुष्ट रोग ठीक हो गया। इसके कुछ दिन बाद राजा को हनुमान जी का स्वप्न आया कि सरोवर में एक प्रतिमा अवस्थित है, उसे मंदिर में स्थापित करो। राजा के सेवकों ने सरोवर में प्रतिमा की तलाश की तो उन्हें एक हनुमान जी की नारी स्वरूप वाली प्रतिमा मिली, जिसे मंदिर में स्थापित किया गया।

बेहद चमत्कारी है बजरंग बली की मूर्ति

राजा को मिली इस मूर्ति में कई विशेषताएं हैं। इस मूर्ति में अद्भुत चमक है। इसका मुख दक्षिण की ओर है और साथ ही मूर्ति पाताल लोक को दर्शाती है। मूर्ति में रावण के पुत्र अहिरवान के हनुमान का वध किया जाता है। यहां अहिरावण को हनुमान जी के बाएं पैर के नीचे और कसाई को दाहिने पैर के नीचे दफनाया गया है। हनुमान जी के कंधों पर भगवान राम और लक्ष्मण की झलक है। उनके एक हाथ में माला और दूसरे हाथ में लड्डू से भरी थाली है।

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