Wednesday, July 24, 2024
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Unique Wedding Tradition : यहां दुल्हन को गोद में उठाकर 7 नहीं 8 फेरे लेता है दुल्हा, 12 घंटे में पूरी होती है विवाह की रस्में

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Unique Wedding Tradition : भारत में विभिन्न धर्मों और समाज में विवाह (Wedding) के अलग-अलग रीति-रिवाज होते है। इनमें से कई समुदाय ऐसे होते है, जिनके रीति-रिवाज व प्रथाएं काफी अजीबो-गरीब होती है, आज हम आपको एक ऐसे ही समुदाय के बारे में बताएंगे जहां दूल्हा-दुल्हन सात की जगह आठ फेरे लेते हैं इसके बाद ही शादी पूरी होती है। इतना ही नहीं यहां फेरे लेने का नियम भी अनोखा है। आइए जानते हैं कि किस जगह ये अनोखी परंपरा (Unique Wedding Tradition) निभाई जाती है और इसके पीछे की दिचस्प वजह क्या है…

Unique Wedding Tradition : इस समुदाय में निभाई जाती है ये अनूठी परंपरा

दरअसल, हम जिस समुदाय की बात कर रहे है वो उदयपुर (Udaipur) का श्रीमाली समाज (Shrimali Community) है, जो इस अनूठे रीति रिवाज (Unique Wedding Tradition) का पालन करता है। यहां शादी की यह रस्म 12 घंटे में पूरी होती है। यहां दूल्हा, दुल्हन को गोद में उठाकर 7 की जगह 8 फेरे लेता है, पहले चार फेरे रात में लिए जाते हैं और बाकी चार सुबह के वक्त लिए जाते हैं। इसके बाद ही शादी संपन्न होती है।

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इसलिए दूल्हा-दुल्हन लेते है आठ फेरे

पंडित नरेश वैष्णव ने बताया कि श्रीमाली समाज के आराध्य भगवान श्रीकृष्ण (Lord Shri Krishna) हैं। कृष्ण विवाह के अनुसार ही समाज में शादी होती है। इसके पीछे मान्यता यह है कि भगवान कृष्ण और माता रुक्मिणी का विवाह हो रहा था तब माता रुक्मिणी (Rukmini) के पैर में चोट लग गई थी, तो भगवान कृष्ण ने माता रुक्मिणी को गोद मे उठाकर फेरे लिए थे। यह भी कहा जाता है कि जब दोनों का विवाह हो रहा था तब शिशुपाल भगवान कृष्ण से युद्ध के लिए आया था। उस समय चार फेरे ही हुए थे और भगवान कृष्ण युद्ध के लिए निकल पड़े थे। सुबह वह लौटे और फिर चार फेरे लिए, इसके बाद से ही आठ फेरों की परंपरा शुरू हुई।

12 घंटे तक चलती हैं शादी की रस्म

पंडित नरेश वैष्णव ने बताया कि फेरों की रस्म शुरू होती है तब पहले चार फेरे लिए जाते हैं। इसके बाद कन्यादान, अंगूठा पकड़ाई सहित अन्य रस्में होती हैं। फिर चार फेरे होते हैं। ऐसे में परिवार बड़ा हो तो 12 घंटा रस्मों को पूरा करने में लग जाता हैं। इसके बाद ही विवाह संपन्न होता है।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई दूल्हा, दुल्हन को गोद में उठाने में सक्षम ना हो तो हाथ पकड़कर रस्म निभाई जाती है।

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